Faculty

हिन्दी विभाग - सदस्यगण

urmil singh

डाँ. उर्मिला सिंह आधुनिक व मध्यकालीन कविता, काव्याध्यात्म व दर्शन

एसोसिएट प्रोफ़ेसर के रूप में हिंदी विभाग, मिरांडा हाउस, दिल्ली विश्वविद्यालय में १९७७ से कार्यरत. दिल्ली विश्वविद्यालय से एम.ए., पीएच. डी. ‘हिंदी की राष्ट्रीय सांस्कृतिक कविता’ विषय पर शोध प्रबंध. यू जी सी रिसर्च फेलोशिप प्राप्त. कला संकाय, दिल्ली विश्वविद्यालय, नेशनल मीडिया सेंटर की सदस्य. नियो इंडिका, भारतायन, भारतीय संस्कृति कोश, श्री गुरु भागवत—एक दिव्य अनुभूति आदि में लेख प्रकाशित.


nisha nag

सुश्री निशा नाग– आधुनिक कविता, आलोचना, संचारमाध्यम, भारतीय साहित्य का इतिहास

निशा नाग ने दिल्ली विश्नविद्यालय से एम.ए. और एम.फिल. परीक्षा उतीर्ण की है तथा जामिया मीलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में 'राजनीतिक संदर्भों की हिन्दी कविता" विषय पर शोध प्रंबध जमा करवाया है ।इसके साथ ही केन्द्रीय हिन्दी संस्थान से अनुप्रयुक्त भाषा विज्ञान एवम पत्रकारिता में डिप्लोमा किया है। निशा आकाश वाणी से भी जुडी रही हैं। ये उदघोषक रही हैं तथा अनेक वार्ताओं एवम कार्यक्रम प्रस्तुतियों में भाग लिया है । इनके अनेक लेख एवम कहानियाँ हिन्दी की प्रतिष्ठित पत्र पत्रिकाओं जैसे हंस ,कथादेश ,जनसत्ता ,पाखी, बयान, अलाव समकालीन भारतीय साहिय, में छपते रहे हैं तथा ये समय समय पर राष्ट्रीय संगोष्ठ्यों में भाग लेती रही हैं।


Rajni disodia

डाँ. रजनी दिसोदिया– कथा साहित्य, दलित साहित्य एवं आलोचना, मध्यकालीन कविता

दिल्ली विश्वविद्यालय से एम.ए., एम.फिल. और पीएच. डी. ‘त्यागपत्र की मृणाल और नदी के द्वीप की रेखा का तुलनात्मक अध्ययन’ विषय पर एम. फिल. ‘रांगेय राघव के उपन्यासों में दलित चेतना’ विषय पर पीएच. डी. गत पन्द्रह वर्षों से मिरांडा हाउस में अध्यापन. विशेष अध्ययन और रुचि के क्षत्र—भाषा और समाज, शिक्षा और संस्कृति, दलित विमर्श एवं चेतना, कथा साहित्य. प्रकाशित कृतियाँ—‘भाषा सहित और सर्जनात्मकता-१’ (दिल्ली विश्वविद्यालय के चारवर्षीय पाठ्यक्रम पर आधारित फाउंडेशन कोर्स की पुस्तक), ‘चारपाई’ (कहानी संग्रह), महत्वपूर्ण पत्र-पत्रिकाओं में, कहानियाँ, वैचारिक एवं साहित्यिक आलोचना सम्बन्धी लेख प्रकाशित.


डाँ. रमा यादव – आधुनिक हिंदी नाटक

डॉ रमा यादव ने दिल्ली विश्वविद्यालय से हिन्दी नाटक में पीएच.डी की। रमा यादव के एम्.ए तथा एम्.फिल में अध्यन के विशेष क्षेत्र आधुनिक कविता रहे । आरम्भ से ही नाटक तथा रंगमंच में उनकी विशेष रुचि रही । डॉ रमा यादव ने सन २००२ में श्रीराम सेंटर फॉर पर्फोर्मिंग आर्ट्स से नाट्य के अभिनय और निर्देशन के क्षेत्र में दो साल का विधिवत प्रशिक्षण लिया ।दिल्ली के श्रीराम सेंटर, कमानी, अभिमंच तथा मुंबई के पृथ्वी, लखनऊ के रविन्द्रालय सहित रमा यादव ने अनेक भारतीय मंचों पर महत्वपूर्ण भूमिकाओं का निर्वहन किया । रमा यादव प्रसिद्ध रंग निर्देशक भानु भारती की आज थियेटर रेपैट्री से सन २००२ से जुड़ी हैं और इस मध्य उन्होंने २०११ में फिरोजशाह कोटला में होने वाले नाटक तुगलक में सह- निर्देशक की भूमिका भी निभाही ।वर्ष १९९९ में रमा यादव ने भारतीय अनुवाद परिषद् से अनुवाद में एक वर्षीय डिप्लोमा भी किया इसके साथ ही उन्होंने कई रेडियो नाटक और कहानियां भी लिखी जो समय- समय पर रेडियो पर प्रसारित होती रही ।डॉ रमा यादव की रूचि भारतीय क्लासिकल और लोक नृत्य में भी रही वर्ष २०१३ में उन्हें आई. सी. सी. आर द्वारा दो वर्षों के लिए हिन्दी चेयर पर हंगरी की राजधानी बुदापैश्त भेजा गया जहाँ उन्होंने हिन्दी पढ़ाने के अतिरिक्त अनेक सांस्कृतिक गतिविधियों को अंजाम दिया । इस दौरान डॉ रमा यादव ने मध्यकालीन कवयित्री मीराबाई पर विशेष अध्यन किया तथा मीरा पर विशेष लेख लिखे और उन्हें विविध मंचों से प्रस्तुत भी किया । आस्ट्रिया की वियना यूनिवर्सिटी में पढ़ा मीरा का पर्चा इस यात्रा का उनका विशेष पर्चा रहा । साथ ही उनके द्वारा निर्देशित और अभीनीत मीराबाई का मंचन हंगरी के विभिन्न मंचों पर हुआ । इसके अतिरिक्त डॉ रमा यादव ने अपने यूरोप प्रवास के दौरान वहाँ की महत्वपूर्ण पत्रिका अमृत में भी सम्पादन सहयोग दिया और अनेक लोक नृत्यों का निर्देशन किया । नाटक के साथ आधुनिक और मध्यकालीन कविता उनके अध्यन के प्रमुख क्षेत्र हैं l डॉ रमा यादव हिन्दी की अनेक पत्रिकाओं में समय-समय पर नाट्य संबंधी लेख, कविताएँ और कहानियां लिखती रही हैं ।


kavita

डाँ. कविता भाटिया - आधुनिक हिंदी कविता, पत्रकारिता

दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी साहित्य में एम.ए., एम.फिल. तथा पीएच.डी.. जनसंचार में पी.जी. डिप्लोमा. विशेष अध्ययन क्षेत्र – आधुनिक कविता एवं जनसंचार. समकालीन साहित्यिक पत्र- पत्रिकाओं में कविताएँ, लेख एवं समीक्षाएं प्रकाशित. उत्कृष्ट कविता लेखन के लिए हिंदी अकादमी, दिल्ली से दो बार पुरस्कृत. प्रथम काव्य संग्रह ‘आपात समय के लिए’ सन् 2000 तथा दूसरा काव्य संग्रह ‘किसी नवजात सुबह का इंतजार’ सन् 2008 में प्रकाशित.


balwant  kaur

डाँ. बलवंत कौर– हिंदी और उर्दू कहानिया, आधुनिक हिंदी कविता, संचार माध्यम,हिंदी कम्पयूट्रर

दिल्ली विश्वविद्यालय से एम.ए, पीएच. डी. । पत्रकारिता तथा जनसंचार में स्नातकोत्तर डिप्लोमा। आधुनिक हिन्दी-उर्दू कथा साहित्य तथा मध्कालीन स्त्री कविता में विशेष रूचि। कई राष्ट्रीय संगोष्ठियों में शिरकत भी की। हिन्दी की प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में अनेक लेख व अनुवाद प्रकाशित । साहित्यिक पत्रिका हंस में भी कुछ समय तक सम्पादन सहयोग दिया। इसके अतिरिक्त तीन किताबों ‘देहरि भई विदेस’, ‘काश में राष्द्र-द्रोही होता’, ‘वे हमें बदल रहें हैं’ का सम्पादन।


Renu Aroa

डाँ. रेणू अरोड़ा - आधुनिक हिंदी नाटक, संचार माध्यम, अनुवाद

प्राध्यापिका नाटक और रंगमंच के क्षेत्र से जुड़ी हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय से पी.एच.डी की उपाधि प्राप्त की है। नाटक और रंगमंच से जुड़े कई लेख समय- समय पर प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में छपे । जनसत्ता (हिन्दी दैनिक-पत्र) में समय-समय पर दुनिया मेरे आगे कॉलम के लिए लेखन व संपादकीय लेख प्रकाशित।


Chanda

डाँ. चंदा सागर – नेत्रहीन, दलित साहित्य और आलोचना

 


uma meena

डाँ. उमा मीणा – भक्ति काव्य, साहित्य का इतिहास, दलित साहित्य- आत्म्वृत्त के संदर्भ में

राजस्थान विश्वविद्यालय से एम.ए., एम.फिल. पीएच. डी. यूजीसी नेट उत्तीर्ण तथा जूनियर रिसर्च फेलोशिप प्राप्त. ‘हिंदी आत्मकथा साहित्य : स्वरूप व विश्लेषण’ विषय पर शोध कार्य. ‘दलित आत्मकथाओं में अम्बेडकरवादी चेतना’, ‘स्त्री लेखन : आत्म का विस्तार’, ‘दलित आन्दोलन में स्त्रियों की रचनात्मक भागीदारी’ शीर्षक लेख प्रकाशित. विभिन्न राष्ट्रीय संगोष्ठियों, कार्यशालाओं तथा सेमिनारों में आलेख प्रस्तुति और भागीदारी. विभिन्न पुस्तकों और पत्रिकाओं में लेख तथा कविताएँ प्रकाशित. ‘’आत्मकथा साहित्य : स्मृतियों का प्रत्याख्यान’ शीर्षक पुस्तक शीघ्र प्रकाश्य.


aparajita

सुश्री अपराजिता शर्मा– आलोचना, आधुनिक कविता

अपराजिता शर्मा मिजाज़ से चित्रकार और पेशे से अध्यापिका हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय से लगातार बी.ए.,एम्.ए.,और एम्.फिल में टॉप करते हुए वर्ष 2006 में मिरान्डा हाउस कॉलेज में हिंदी प्राध्यापिका के पद पर नियुक्त हुई।लेडी श्री राम कॉलेज से डॉ. भारत भूषण अग्रवाल छात्रवृत्ति( वर्ष 2000) और दिल्ली विकास प्राधिकरण से हिंदी विषय में एम्.ए. स्तर पर सर्वाधिक अंक प्राप्त करने के लिए वर्ष 2003 में विशेष पुरूस्कार प्राप्त किया। वर्ष (2006) में दिल्ली विश्वविद्यालय से ही पीएच.डी. शोध प्रबंध के लिए पंजीकृत हुई। लगभग एक वर्ष तक बाल-पत्रिका 'किल्लोल' के लिए कला संपादक के रूप में काम किया। लोक कलाओं में विशेष रूचि के कारण मधुबनी चित्र शैली,सौरा कला और वर्ली कला के लिए महाविद्यालय में कई वर्कशॉप भी ली तथा आयोजित भी की। लघु पत्रिकाओं में समय समय पर समीक्षा और लेख भी लिखती रही हैं। पिछले लगभग 8 वर्षों से अपना ब्लॉग 'चश्म-ए-बद्दूर' और 'बालवृन्द' भी लिख रही हैं।


Dr. Sangeeta Rai - आधुनिक हिंदी नाटक